tag:blogger.com,1999:blog-8138267.post110889899063290684..comments2007-04-17T06:50:33.400-07:00Comments on ठलुआ: सौ में नब्बे बेईमान, फिर भी मेरा भारत महानइंद्र अवस्थीhttp://www.blogger.com/profile/08625731001861201733noreply@blogger.comBlogger5125tag:blogger.com,1999:blog-8138267.post-1108998285113819202005-02-21T07:04:00.000-08:002005-02-21T07:04:00.000-08:00खूब लिखा है बन्धु | पर "सेक्युलर मिशन" वालों को भू...खूब लिखा है बन्धु | पर "सेक्युलर मिशन" वालों को भूल गये क्या ? सुना है , सूनामी पीडितों के घर पहुँच गये थे , 'प्रार्थना' करने ... शब्दों के खेल भी अजब निराले हैं |अनुनाद सिंहhttp://www.blogger.com/profile/05634421007709892634noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8138267.post-1108997950465398692005-02-21T06:59:00.000-08:002005-02-21T06:59:00.000-08:00माननीय अवस्थी जी लेख तो धुरंधर है पर धर्मनिरपेक्षो...माननीय अवस्थी जी<br />लेख तो धुरंधर है पर धर्मनिरपेक्षो की धुलाई करते करते आप आप ने नीच भाजपाईयों को क्यो छोड़ दिया| पहले एक स्पष्टीकरण दे दूँ कि मेरी विचारधारा किसी भी झंडे से नहीं जुड़ी है यानि की एकदम निरपेक्ष| बस धुलाई उसी की करने का मूड होता है जिससे उम्मीद होती है| उम्मीदे सबसे ज्यादा केसरिया झंडे वालो से थी और सबसे ज्यादा उन्होने ही तोड़ी| मान लिया राममंदिर इनकी मजबूरी नही थी पर कश्मीर में धारा ३५६ हटाना के लिए एक प्रस्ताव तक न ला सके जब्कि बाजपेयी जी कश्मीर में मुफ्ती सईद के साथ शायरी कंपटीशन में पीछे नही रहे| कभी गये ठाकरे ,तोगड़िया या आडवाणी त्रिशूल लेकर कि कश्मीरी पंडितो को उनके घर वापस दिला दें| जावेद आनंद ने गलत नक्शे लगाये उस बारे में ज्यादा पड़ताल नहीं की मैने पर तवलीन सिंह ने जब हमला किया था मिंयाँ बीभी पर कि तुम्हारी मैगजीन पेट्रो डालर से चलतौ है और तुम सिर्फ मियाँ लोगो के आँसू पोंछते हो तो जावेद ने पूरी लिस्ट छाप दी थी पुराने लेखों की, जिसमें कश्मीरी पंडितो पर लेख भी था और तथाकथित फतवा जारी करने वालों की धुलाई भी| चलो मान लिया कि रामंदिर और कश्मीर के मुद्दे पर काले चश्मे वाले करूणानिधि और नायडू टाँग घसीटते थे पर अवैध बांग्लादेशियों के मुद्दे पर केसरिया गुट हिंजड़ा क्यों बना रहा? क्यों नही निकाल बाहर किया दिल्ली से उनको? क्यों खून नही खोला उनका जब बीस बीएसएफ के जवानों की लाशे जानवरों की तरह आयी बांगलादेश से? क्यों संसद पर हमले के महीनों बाद छाती पिट रहे थे बाजपेयी जी की हाय तब ही क्यो नही मुँहतोड़ जवाब दे दिया था| अजी आगरा वार्ता तो बहाना थी, असली मुद्दा गैस पाईपलाईन है| अवस्थी जी जितने चोट्टे कम्यूनिस्ट हैं उतने ही केसरिया दल वाले भी| इनको वतनपरस्ती से कोई मतलब नहीं है| तबीयत करती है कि रामगोपाल वर्मा के विष्णु प्रसाद की तरह आगर एक दिन के लिए गायब होने कौ शक्ति मिल जाये तो झापड़ मार मार कर इन लोगो को टीवी पर सच बोलने पर मजबूर कर दूँ कि जैसे मायावती दलितो की मसीहा बनकर चिल्लाती है वैसे ही मध्यम और संपन्न वर्ग के कल्चरल और सोशल लैग के फिलर भरने के लिए केसरिया झंडे वाले मुद्दे बुनते हैं|Atul Arorahttp://www.blogger.com/profile/00089994381073710523noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8138267.post-1108974804854390132005-02-21T00:33:00.000-08:002005-02-21T00:33:00.000-08:00आओ बन्धुवर, स्वागतम,पूरे अस्सी दिन बाद लौटे हो. आप...आओ बन्धुवर, स्वागतम,पूरे अस्सी दिन बाद लौटे हो.<br />आपको सजा तो जरूर मिलनी चाहिये.<br />अब आपकी सजा ये है कि मे अपनी टिप्पणी भी आठ दिन बाद ही लिखूंगा.Jitendra Chaudharyhttp://www.blogger.com/profile/09573786385391773022noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8138267.post-1108970005521504782005-02-20T23:13:00.000-08:002005-02-20T23:13:00.000-08:00बहुत सही लिखे हो बंधु, बधाई। भारत का सही चित्रण है...बहुत सही लिखे हो बंधु, बधाई। भारत का सही चित्रण है।आशीषhttp://www.blogger.com/profile/15373573505567241038noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8138267.post-1108937116780066172005-02-20T14:05:00.000-08:002005-02-20T14:05:00.000-08:00अवस्थी साहब, मुझे लगता है निबंध वाहवाही देने से शा...अवस्थी साहब, मुझे लगता है निबंध वाहवाही देने से शायद कहीं ज्यादा उपर है। विशद और गहन लेख और वो भी समझ में आनेवाली भाषा में, निश्चित तौर पर बधाई का पात्र है। आशा है आपके निबंध से प्रेरित होकर कुछ और लेखनी चलेगी।Vijay Thakurhttp://www.blogger.com/profile/15528692817447149135noreply@blogger.com